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बेबी महतो व JLKM के संघर्ष से आदित्यपुर गूंजा – कंपनी को झुकना पड़ा”

48 मज़दूरों की बहाली पर लिखित समझौता"

आदित्यपुर में मजदूरों के प्रदर्शन के बाद प्रशासन झुका, 48 की बहाली का मिला लिखित आश्वासन

आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र के झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के तत्वावधान में क्राफ्ट्समेन ऑटोमेशन लिमिटेड के 48 निष्कासित मजदूरों की बहाली की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन के बाद गम्हरिया प्रखंड के प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी (BCO) सुनील चौधरी ने हस्तक्षेप करते हुए JLKM को मजदूरों की बहाली का लिखित आश्वासन दिया।
BCO सुनील चौधरी के हस्तक्षेप के बाद दोनों पक्षों के बीच वार्ता हुई, जिसमें निम्नलिखित बिंदुओं पर सहमति बनी:

सभी 48 मजदूरों को काम पर रखा जाएगा।इनमें से 6 मजदूरों का मामला विचाराधीन है; यदि वे अपना मुकदमा वापस लेते हैं, तो उन्हें भी पुनः बहाल किया जाएगा।शेष सभी मजदूरों की बहाली की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी।

जेएलकेएम के केंद्रीय उपाध्यक्ष बेबी महतो ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले 10 दिनों के भीतर इस आश्वासन पर अमल नहीं होता है, तो पार्टी मजदूरों के साथ मिलकर एक शांतिपूर्ण लेकिन और भी मजबूत आंदोलन करेगी।

प्रशासनिक स्तर पर यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि मजदूरों को उनका हक नहीं मिलता है, तो प्रशासन इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा और इसे पूरी तरह से कंपनी तथा मजदूरों के बीच का मामला माना जाएगा।

JLKM ने कंपनी प्रबंधन के ‘तानाशाही रवैये’ की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पार्टी ने दोहराया कि मजदूरों को उनका हक मिलना ही चाहिए और JLKM इस ‘लड़ाई’ में हमेशा उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी।

इस मौके पर JLKM के केंद्रीय उपाध्यक्ष बेबी महतो और तरुण महतो, केंद्रीय संगठन मंत्री संजय गोराई, जिला अध्यक्ष दीपक महतो, गम्हरिया प्रखंड अध्यक्ष विजय महतो, जिला कोषाध्यक्ष रोहित प्रधान, कोल्हान व्हाइट उपाध्यक्ष धीरेन महतो, कोषाध्यक्ष राज महतो, जमशेदपुर महानगर उपाध्यक्ष करण गोराई सहित नवीन चंद्र गोराई प्रेम महतो, आस्तिक महतो, भोलू महतो, धनंजय महतो, विशाल महतो, ब्रिज जामुदा, प्रकाश महतो, रूपेश गोराई, संजीव महतो, गोया महतो, भागीरथ महतो, लक्ष्मण महतो, रोहित महतो, कुंदन सिंह, सुजीत कुमार, ननका तिवारी, संजीत जेना, गौरव दास एवं अन्य कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

यह घटना आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिक अधिकारों को लेकर चल रहे तनाव को उजागर करती है, जहां मजदूरों को अपने हक के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। अब सबकी निगाहें अगले 10 दिनों पर टिकी हैं कि क्या कंपनी प्रबंधन दिए गए आश्वासन पर अमल करता है या JLKM को अपना अगला आंदोलन शुरू करना पड़ेगा।

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