बुद्ध धम्म की राह पर मनाई गई अशोक विजयदशमी
सत्ता ने दशहरा और दुर्गा पूजा की कहानियां गढ़कर अशोक और बुद्ध धम्म के प्रभाव को कमजोर करने का प्रयास

शास्त्री नगर कदमा स्थित रविदास भवन में बुधवार को अशोक विजयदशमी का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर अर्जक संघ, मूलनिवासी संघ, पीपीआईडी, बामसेफ और रविदास समाज पूर्वी सिंहभूम से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मू. विजय शंकर सिंह ने की जबकि मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. आई.के. सिंह ने विजयदशमी के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस पर्व का संबंध वास्तव में सम्राट अशोक से है।

कलिंग युद्ध की विभीषिका देखने के बाद अशोक ने हिंसा और युद्ध का त्याग कर बुद्ध धम्म अपनाया तथा करुणा, समता और मानवता पर आधारित शासन व्यवस्था स्थापित की। वक्ताओं ने बताया कि धम्म धारण की इसी तिथि को विजयदशमी के रूप में मनाने की परंपरा प्रारंभ हुई।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि सत्ता ने दशहरा और दुर्गा पूजा की कहानियां गढ़कर अशोक और बुद्ध धम्म के प्रभाव को कमजोर करने का प्रयास किया। इस अवसर पर समाज सुधारकों ज्योतिबा फुले और डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान का भी स्मरण किया गया।
समारोह में मां हरि बालक प्रसाद, कुसुम कुशवाहा, सुदर्शन सिंह, विजय प्रसाद, अरविंद कुमार सिंह, चंदेश्वरी यादव, ए. करूआ, सरयु रविदास और विजय शंकर सिंह ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन विश्राम राम ने किया।




