जमशेदपुर पूर्वी सिंहभूम

पोटका के बांधडीह गांव में तीन दिनों से गिरा हुआ है मिट्टी का मकान

जादूगोड़ा पुलिस ने सबकुछ जानकर भी मुंह फेरा

जमशेदपुर : कहने को तो आपदा में जिला प्रशासन का अमला समय पर पहुंच जाता है और राहत कार्य शुरू कराने के साथ-साथ वहां के प्रभावितों का भी पूरा ख्याल रखता है, लेकिन जिले से सटे हुए ही पोटका प्रखंड है. यहां के हाथीबिंदा पंचायत के बांधडीह गांव में पांच परिवार का मकान पिछले तीन दिनों से जलमग्न है. इसकी जानकारी पोटका थाने में भी दी गई थी, लेकिन पुलिस ने भी अपना मुंह ही फेर लिया. जिला प्रशासन का अमला भी सो रहा है. प्रशासनिक अधिकारियों को भी लगता है इसकी भनक नहीं लगी थी. कम-से-कम मुखिया को तो इस दिशा में पहल करनी ही चाहिए थी.

प्रभावित होने वाले परिवार के लोगों में शिव कुमार महतो, डोमन कुमार महतो, भवतोष कुमार महतो, धीरेन कुमार महतो और राजेश कुमार महतो प्रभावित हुए हैं.

खाने-पीने का सामान भी निगल गया है पानी

अचानक से बारिश का पानी घरों में प्रवेश कर जाने से घर में रखे सभी खाने-पीने के सामान नष्ट हो गये है. कपड़े व अन्य सामान भी खराब हो गया है.

दूसरे के घर में जाकर ली है शरण

मकान जलमग्न होने से प्रभावित परिवार के सदस्यों ने दूसरे के मकान में जाकर शरण ली है. शिव कुमार महतो के घर में भी पानी प्रवेश कर चुका है, लेकिन उनका मकान पक्का का होने के कारण सभी लोग उनके घर में ही अपना सिर छिपाए हुए हैं.

गश्ती टीम पहुंची थी, थानेदार को नहीं दी जानकारी

घटना की जानकारी किसी तरह से परिवार के सदस्यों ने जादूगोड़ा पुलिस तक पहुंचायी थी. इसके बाद जादूगोड़ा पुलिस भी मौके पर पहुंची थी. इस बीच तपाक से जवाब दे दिया कि वे कुछ भी नहीं कर सकते हैं. इधर थाना प्रभारी से  बात करने पर उन्होंने साफ कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है. गश्ती टीम गई होगी.

नहीं मिला है अबुआ आवास

बाढ़ की विभीषिका में प्रभावित परिवार के किसी भी सदस्य को अबुआ आवास तक की सुविधा नहीं मिली है. परिवार के सदस्य आज तक मिट्टी के मकान में ही रहते हैं.

फेल हो गया है कि प्रशासनिक सूचना तंत्र

जिस तरह से पांच मकान प्रभावित हुआ है और प्रशासनिक अमला तक को इसकी जानकारी नहीं है. उससे तो साफ लग रहा है कि प्रशासनिक सूचना तंत्र पूरी तरह से फेल हो गया है. जबकि क्षेत्र पंचायत में पड़ता है. मुखिया को पहल करनी चाहिए थी

नेताओं ने भी नहीं ली है सुधि

पोटका में नेताओं की भरमार हैं, लेकिन किसी ने भी मौके पर जाकर प्रभावितों की सुधि नहीं ली है. परिवार के लोग कितने परेशान हैं गांव में जाकर ही पता चलता है.

आस लगाए बैठा है प्रभावित परिवार

मकान जलमग्न होने के बाद प्रभावित परिवार के लोग यह आस लगाए बैठे हुए हैं कि काश उनकी कोई मदद करता?  खाने के लिए भी कुछ सामान नहीं बचा है. ऐसे में उनकी दीनचर्या कैसे कट रही होगी इसका महज अंदाजा लगाया जा सकता है.

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